आज कल जहाँ देखो संघ के खिलाफ खूब जहर उगला जा रहा है
चाहे राहुल गाँधी ,दिग्गविजय सिंह या और कोई कांग्रेसी नेता यहाँ तक की मीडिया भी इनका समर्थन कर रही है इनका मकसद सिर्फ यही है की कैसे अन्ना हजारे जी के आंदोलन की धार कम हो जाये ..यहाँ तक इन्होने आतंकी संगठन "सिमी (Students Islamic Movement of India )" से "RSS" की तुलना कर डाली .
परन्तु इन्हें तो बस अपनी कुर्सी से मतलब है दिग्विजय सिंह के चित्र आजमगढ़ के आरोपी आतंकी तत्वों के परिजनों के साथ छपे थे, सिंह उन परिवारों के घर विलाप करने गए थे। सिंह और कांग्रेस को ऐसे चित्रों में ही वोट बैंक सधता दिखाई पड़ता है।
पर "RSS" ने देश के लिए योगदान दिया इस से इन्हें क्या मतलब
१. संघ ने १९७१ के उडीसा चक्रवात और १९७७ के आंध्र प्रदेश चक्रवात में रहत कार्यों में महती भूमिका निभाई हे .
२. संघ से जुडी सेवा भारती ने जम्मू कश्मीर से आतंकवाद से परेशान ५७ अनाथ बच्चों को गोद लिया हे जिनमे ३८ मुस्लिम और १९ हिंदू हे|
३.बाबा साहब अम्बेडकर ने मई १९३९ में पुणे के संघ शिविर में कहा था – “अपने पास के स्वयं -सेवकों की जाति को जानने की उत्सुकता तक नही रखकर , परिपूर्ण समानता और भ्रातृत्व के साथ यहाँ व्यवहार करने वाले स्वयंसेवकों कोदेख कर मुझे आश्चर्य होता है । ”
४.सन १९६२ में चीन ने हिन्दी-चीनी भाई के नारे को ठेंगा दिखाते हुए भारत पर हमला कर दिया । भारत को अब किसी युद्ध में जाने की जरुरत नही है सेना का कम तो बस परेड में भाग लेना भर है की नेहरूवादी सोच के कारण सेना लडाई के लिए तैयार नही थी । तब तुंरत ही स्वयंसेवक मैदान में कूद गए । सेना के जवानों के लिए जी जन से समर्थन जुटाया वहीँ भारतीय मजदूर संघ ( ये भी संघ का प्रकल्प है) ने कम्युनिस्ट यूनियनों के एक बड़े वार्ग्ग की रक्षा उत्पादन बंद करने की देशद्रोही साजिश को समाप्त किया । तब प्रथम प्रधानमंत्री पंडित नेहरू संघ के कार्य से इतने प्रभावित हुए की कांग्रेसी विरोध को दरकिनार करते हुए २६ जनवरी १९६३ की गणतंत्र दिवस परेड में सम्मिलित होने का निमंत्रण दिया ।”
५. *१९७९ के अगस्त माह में गुजरात के मच्छु बाँध टूटने से आई बाढ़ से मौरवी जलमग्न हो गया था । संघ के सेवा शिविर में ४००० मुसलमानों ने रोजे रखे थे । अटल जी जब वहां गए थे तो मुसलमानों ने कहा था -’अगर संघ नही होता तो हम जिन्दा नही बचते । ‘
६. *१२ नवम्बर १९९६ चर्खादादरी , दो मुस्लिम देशों के यात्री विमानों का टकराना , ३१२ की मौत जिसमे अधिकांश मुस्लिम और भिवानी के स्वयंसेवकों का तुंरत घटना स्थल पर पहुंचना , मलवे से शव निकलना सारी सहायता उपलब्ध करना । इतना ही नही शवों के उचित रीति रिवाज से उनके धर्मानुसार अन्तिम संस्कार का इन्तेजाम करना । तब साउदी अरेबिया के एक समाचारपत्र ‘अलरियद ‘ ने आर एस एस लिखा था- ”
७.वर्तमान समय में संघ के दर्शन का पालन करने वाले कतिपय लोग देश के सर्वोच्च पदों तक पहुँचने मे भीं सफल रहे हैं। ऐसे प्रमुख व्यक्तियों में उपराष्ट्रपति पद पर भैरोंसिंह शेखावत, प्रधानमंत्री पद पर अटल बिहारी वाजपेयी .
अब में पूछता हु दिग्विजय सिंह और राहुल गाँधी से जिन्होंने कई बार "सिमी " और संघ(RSS) को एक सा बतया है .
क्या अबी तक "सिमी" ने कोई ऐसा काम किया है अगर किया है तो वो सिर्फ राहुल गाँधी ,दिग्गविजय और कांग्रेस के नेता
लोगो को पता होगा
चाहे राहुल गाँधी ,दिग्गविजय सिंह या और कोई कांग्रेसी नेता यहाँ तक की मीडिया भी इनका समर्थन कर रही है इनका मकसद सिर्फ यही है की कैसे अन्ना हजारे जी के आंदोलन की धार कम हो जाये ..यहाँ तक इन्होने आतंकी संगठन "सिमी (Students Islamic Movement of India )" से "RSS" की तुलना कर डाली .
परन्तु इन्हें तो बस अपनी कुर्सी से मतलब है दिग्विजय सिंह के चित्र आजमगढ़ के आरोपी आतंकी तत्वों के परिजनों के साथ छपे थे, सिंह उन परिवारों के घर विलाप करने गए थे। सिंह और कांग्रेस को ऐसे चित्रों में ही वोट बैंक सधता दिखाई पड़ता है।
पर "RSS" ने देश के लिए योगदान दिया इस से इन्हें क्या मतलब
१. संघ ने १९७१ के उडीसा चक्रवात और १९७७ के आंध्र प्रदेश चक्रवात में रहत कार्यों में महती भूमिका निभाई हे .
२. संघ से जुडी सेवा भारती ने जम्मू कश्मीर से आतंकवाद से परेशान ५७ अनाथ बच्चों को गोद लिया हे जिनमे ३८ मुस्लिम और १९ हिंदू हे|
३.बाबा साहब अम्बेडकर ने मई १९३९ में पुणे के संघ शिविर में कहा था – “अपने पास के स्वयं -सेवकों की जाति को जानने की उत्सुकता तक नही रखकर , परिपूर्ण समानता और भ्रातृत्व के साथ यहाँ व्यवहार करने वाले स्वयंसेवकों कोदेख कर मुझे आश्चर्य होता है । ”
४.सन १९६२ में चीन ने हिन्दी-चीनी भाई के नारे को ठेंगा दिखाते हुए भारत पर हमला कर दिया । भारत को अब किसी युद्ध में जाने की जरुरत नही है सेना का कम तो बस परेड में भाग लेना भर है की नेहरूवादी सोच के कारण सेना लडाई के लिए तैयार नही थी । तब तुंरत ही स्वयंसेवक मैदान में कूद गए । सेना के जवानों के लिए जी जन से समर्थन जुटाया वहीँ भारतीय मजदूर संघ ( ये भी संघ का प्रकल्प है) ने कम्युनिस्ट यूनियनों के एक बड़े वार्ग्ग की रक्षा उत्पादन बंद करने की देशद्रोही साजिश को समाप्त किया । तब प्रथम प्रधानमंत्री पंडित नेहरू संघ के कार्य से इतने प्रभावित हुए की कांग्रेसी विरोध को दरकिनार करते हुए २६ जनवरी १९६३ की गणतंत्र दिवस परेड में सम्मिलित होने का निमंत्रण दिया ।”
५. *१९७९ के अगस्त माह में गुजरात के मच्छु बाँध टूटने से आई बाढ़ से मौरवी जलमग्न हो गया था । संघ के सेवा शिविर में ४००० मुसलमानों ने रोजे रखे थे । अटल जी जब वहां गए थे तो मुसलमानों ने कहा था -’अगर संघ नही होता तो हम जिन्दा नही बचते । ‘
६. *१२ नवम्बर १९९६ चर्खादादरी , दो मुस्लिम देशों के यात्री विमानों का टकराना , ३१२ की मौत जिसमे अधिकांश मुस्लिम और भिवानी के स्वयंसेवकों का तुंरत घटना स्थल पर पहुंचना , मलवे से शव निकलना सारी सहायता उपलब्ध करना । इतना ही नही शवों के उचित रीति रिवाज से उनके धर्मानुसार अन्तिम संस्कार का इन्तेजाम करना । तब साउदी अरेबिया के एक समाचारपत्र ‘अलरियद ‘ ने आर एस एस लिखा था- ”
७.वर्तमान समय में संघ के दर्शन का पालन करने वाले कतिपय लोग देश के सर्वोच्च पदों तक पहुँचने मे भीं सफल रहे हैं। ऐसे प्रमुख व्यक्तियों में उपराष्ट्रपति पद पर भैरोंसिंह शेखावत, प्रधानमंत्री पद पर अटल बिहारी वाजपेयी .
अब में पूछता हु दिग्विजय सिंह और राहुल गाँधी से जिन्होंने कई बार "सिमी " और संघ(RSS) को एक सा बतया है .
क्या अबी तक "सिमी" ने कोई ऐसा काम किया है अगर किया है तो वो सिर्फ राहुल गाँधी ,दिग्गविजय और कांग्रेस के नेता
लोगो को पता होगा
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